सत्य सहज है

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बसंतपंचमी , ऋषिपंचमी [सरस्वती जन्मोत्सव]

Posted On: 29 Jan, 2015 कविता में

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कर मे वीणा , पुस्तकराजे,

वर मुद्राधारी,

वीणा की ध्वनि ,

जन-जन गुंजित,

माँ शारद है तुम्हारी,
देव ,दनुज

माँ तुम को ध्यावै,
ग्यान की ज्योति ,आप से पावै ,
कर मे वीणा , पुस्तकराजे,
वर मुद्राधारी,
वीणा की ध्वनि ,
जन-जन गुंजित,
माँ शारद है तुम्हारी
त्वं ज्ञान की ज्योति प्रचंड अखंड ,
देव सदा नित आस लगावै,
कर मे वीणा , पुस्तकराजे,
वर मुद्राधारी,
वीणा की ध्वनि ,
जन-जन गुंजित,
माँ शारद है तुम्हारी
नारद की वीणा से निकले

माँ तेरी महिमा है अपार,

हर शब्दों मे माँ बसती है ,

करतल की वीणा कहती है
कर मे वीणा , पुस्तकराजे,
वर मुद्राधारी,
वीणा की ध्वनि ,
जन-जन गुंजित,
माँ शारद है तुम्हारी
शेष, महेश ,दिनेश, राकेश,
उमेश सदा गुण आप के गावै,
कर मे वीणा , पुस्तकराजे,
वर मुद्राधारी,
वीणा की ध्वनि ,
जन-जन गुंजित,
माँ शारद है तुम्हारी
कर मे माला,
वींाधारी,
माँ शारद
तेरी ज्योति निराली
घट -घट मे माँ
तू बसती है,

भक्तों के नित

दुख हरती है
कर मे वीणा , पुस्तकराजे,
वर मुद्राधारी,
वीणा की ध्वनि ,
जन-जन गुंजित,
माँ शारद है तुम्हारी
ग्यान चक्षु दे देती
मैय्या,
हंसवाहिनी शारद मैय्या,
कर मे वीणा , पुस्तकराजे,
वर मुद्राधारी,
वीणा की ध्वनि ,
जन-जन गुंजित,
माँ शारद है तुम्हारी

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